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Mahasamund. महासमुंद। जिले के ग्राम पंचायत बड़ेलोरम, जनपद पंचायत पिथौरा के सचिव मोहन पटेल को लापरवाही, उदासीनता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जिला पंचायत महासमुंद ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय पंचायत कार्यालय में नियमित कार्य संचालन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों के कारण लिया गया। प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार, मोहन पटेल द्वारा ग्राम पंचायत कार्यालय का नियमित संचालन नहीं किया जा रहा था। कार्यालय में जन्म-मृत्यु पंजीयन, पेंशन भुगतान, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र निर्माण और अन्य पंचायत कार्यों में लगातार विलंब हो रहा था। इसके अलावा, पटेल ने ग्रामसभा का आयोजन नहीं किया और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती।
प्रतिवेदन में यह भी बताया गया कि सचिव पिछले चार महीनों से कार्यालय में अनुपस्थित थे। इस अवधि के दौरान ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं में बाधा आई और पंचायत कार्यालय का कामकाज ठप पड़ा। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई बार नोटिस और निर्देश देने के बावजूद मोहन पटेल ने कोई सुधार नहीं किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि, “ग्राम पंचायत के सचिव का कर्तव्य है कि वह सभी सरकारी आदेशों का पालन करें और पंचायत कार्यों को समय पर पूर्ण करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोहन पटेल की कार्यशैली से ग्रामवासियों को सेवा में परेशानी हुई, इसलिए उन्हें निलंबित किया गया है।” निलंबन के साथ ही, ग्राम पंचायत बड़ेलोरम में सचिव के रूप में सूरज साहू की तैनाती की गई है। सूरज साहू को निर्देश दिए गए हैं कि वे पंचायत कार्यों को नियमित रूप से संचालित करें, योजनाओं की समयबद्ध समीक्षा करें और ग्रामीणों को बेहतर सेवाएं प्रदान करें।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सचिव की अनुपस्थिति और लापरवाही के कारण कई योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों तक नहीं पहुँच पाया। अब नई नियुक्ति के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि पंचायत कार्यालय में कार्यक्रमों का सुचारू संचालन और सरकारी सेवाओं का समय पर वितरण सुनिश्चित होगा। पंचायत विभाग ने इस निलंबन को सावधानीपूर्ण कार्रवाई बताया और कहा कि अगर किसी अन्य अधिकारी या कर्मी द्वारा भी आदेशों की अवहेलना या लापरवाही की जाती है, तो कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से यह संदेश गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन सभी पंचायत कार्यों की पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गंभीर हैं। निलंबन की कार्यवाही के बाद सूरज साहू ने कहा, “मैं अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ग्रामीणों को सभी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय पर पहुंचाने का प्रयास करूंगा। कार्यालय में नियमितता और सरकारी आदेशों का पालन मेरी प्राथमिकता होगी।” इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि ग्रामीणों की जीवन-स्तर और सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने सभी पंचायत सचिवों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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